बुद्धि का विकास मानव के अस्तित्व का अंतिम लक्ष्य होना चाहिए - बी. आर. अम्बेडकर

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राज सूरज के धधकने का


क्या आप जानते है की ब्रम्हांड ऑक्सीजन विहीन है और किसी भी चीज के जलने के लिए ऑक्सीजन सबसे जरुरी होता है.  फिर भला ऑक्सीजन विहित ब्रम्हांड में भी सूरज में बरसों से आग कैसे धधक रही है.

दरअसल, किसी भी चीज के जलने की लिए सारी प्रक्रिया किसी एक इधन (तेल, कोयला, लकड़ी,) तथा ऑक्सीजन के बिच ही होती है.

लेकिन सूरज में आग का धधकना इन प्रक्रियाओ से बिलकुल भिन्न होता है.

धूमकेतु


  • सौरमण्डल के छोर पर बहुत ही छोटे–छोटे अरबों पिण्ड विद्यमान हैं, जो धूमकेतु (Comet)या पुच्छल तारा कहलाते हैं।
  • Comet शब्द, ग्रीक शब्द komētēs से बना है जिसका अर्थ होता है Hairy one बालों वाला। यह इसी तरह दिखते हैं इसलिये यह नाम पड़ा।
  • धूमकेतु या पुच्छल तारे ( Comet ), चट्टान ( Rock ), धूल ( Dust ) और जमी हुई गैसों ( Gases ) के बने होते हैं। सूर्य के समीप आने पर, गर्मी के कारण, जमी हुई गैसें और धूल के कण सूर्य से विपरीत दिशा में फैल जाते हैं और सूर्य की रोशनी परिवर्तित कर चमकने लगती हैं। इस समय इनकी आकृति को दो मुख्य भागों, सिर तथा पूँछ में बांट सकते हैं। सिर का केंद्र अति चमकीला होता है। यह इसका नाभिक ( Nucleus ) कहलाता है। सूर्य की विपरीत दिशा में बर्फ़ और धूल का चमकीला हिस्सा पूँछ की तरह से लगता है। इसे कोमा ( Coma ) कहा जाता है। यह हमेशा सूर्य से विपरीत दिशा में रहता है। धूमकेतु की इस पूँछ के कारण इसे पुच्छल तारा भी कहते हैं।