बुद्धि का विकास मानव के अस्तित्व का अंतिम लक्ष्य होना चाहिए - बी. आर. अम्बेडकर

चीन की दीवार

  • चीन की यह दीवार आधुनिक विश्व के सात आश्चर्यों में से एक है। और उसके छविया
  • चीन की यह दीवार 5वीं सदी ईसा पूर्व में बननी चालू हुई थी और 16 वीं सदी तक बनती रही।
  • यह दीवार चीन की उत्तरी सीमा पर बनाई गयी थी ताकि मंगोल आक्रमणकारियों को रोका जा सके।
  • चीन की यह दीवार संसार की सबसे लम्बी मानव निर्मित रचना है। जो लगभग 4000 मील (6,400 किलोमीटर) तक फैली है।
  • अंतरिक्ष से लिये गये पृथ्वी के चित्रों में भी यह नज़र आती है।
  • चीन की इस दीवार की चौड़ाई इतनी रखी गयी थी जिसपर 5 घुड़सवार या 10 पैदल सैनिक बगल-बगल में गश्त लगा सकें। इसकी सबसे ज्यादा ऊँचाई 35 फुट है।

रक्षाबन्धन


भाई - बहन के प्रेम व रक्षा का त्योहार
होली, दीवाली और दशहरे की तरह यह भी हिंदुओं का प्रमुख त्योहार है। यह भाई-बहन को स्नेह की डोर से बांधने वाला त्योहार है। यह त्योहार भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक है। रक्षाबंधन का अर्थ है (रक्षा+बंधन) अर्थात किसी को अपनी रक्षा के लिए बांध लेना। इसीलिए राखी बांधते समय बहन कहती है - 'भैया! मैं तुम्हारी शरण में हूँ, मेरी सब प्रकार से रक्षा करना।' आज के दिन बहन अपने भाई के हाथ में राखी बांधती है और उन्हें मिठाई खिलाती है। फलस्वरूप भाई भी अपनी बहन को रुपये या उपहार आदि देते हैं। रक्षाबंधन स्नेह का वह अमूल्य बंधन है जिसका बदला धन तो क्या सर्वस्व देकर भी नहीं चुकाया जा सकता। 

अयन


  • अयन' का अर्थ होता है चलना।
  • पूरे वर्ष में सूर्य गतिमान रहता है, सूर्य की अवस्था से ही ॠतुओं का निर्धारण होता है।
  • हिन्दू धर्म में अयन 'समय प्रणाली' है जिससे ॠतुओं का ज्ञान होता है।
  • क्रांति वृत के प्रथम अंश का विभाजन उत्तर और दक्षिण गोल के मध्यवर्ती धुर्वों के द्वारा माना गया है। यह विभाजन "उत्तरायन" और "दक्षिणायन" कहलाता है।
  • एक वर्ष दो अयन के बराबर होता है और एक अयन देवता का एक दिन होता है. 360 अयन देवता का एक वर्ष बन जाता है।
  • सूर्य की स्थिति के अनुसार वर्ष के आधे भाग को अयन कहते हैं। अयन दो होते हैं-

Happy Frindshi Day एक दिन दोस्ती के नाम...


दोस्तों, सोचिए अगर हमारे दोस्त न होते तो यह दुनिया कितनी बेरंग होती। जिंदगी में खुशियों के रंग भरने वाला हसीन रिश्ता है - दोस्ती।

हम किस घर में जन्म लेंगे, हमारे माता-पिता, भाई-बहन, चाचा-ताऊ कौन होंगे, कैसे होंगे, इनमें से कुछ भी हमारे हाथों में नहीं है। इन सभी रिश्तों के बंधन में ईश्वर खुद हमें बाँधकर इस धरती पर भेजता है।

इसके बावजूद ईश्वर ने एक ऐसे खूबसूरत रिश्ते की बागडोर पूरी तरह से हमारे हाथों में सौंप दी है, जिसके साथ हमारे जीवन की सारी खुशियाँ और सारे गम जुड़े होते हैं। ईश्वर ने हमें पूरी स्वतंत्रता दी है कि हम अपने दोस्त खुद बनाएँ और यह रिश्ता जैसे चाहे, वैसे निभाएँ।

प्यार भरे रिश्ते को सम्मान दिलाने के लिए अमेरिका में कुछ लोगों ने एक दिन दोस्ती के नाम करना तय किया। उनकी कोशिशें रंग लाईं और सन् 1935 में अमेरिका में अगस्त के पहले रविवार को आधिकारिक रूप से फ्रेंडशिप डे (मित्रता दिवस) घोषित किया गया। पिछले 72 सालों में फ्रेंडशिप डे ने अमेरिका की सरहदों को लाँघकर पूरे विश्व में अपना स्थान बना लिया है। जिस तरह से दोस्ती का जज्बा हर दिल में होता है, वैसे ही फ्रेंडशिप डे भी दुनिया के हर मुल्क में मनाया जाने लगा।

राशन कार्ड के लिए आवेदन करना

राशन कार्ड क्‍या है और इसकी आवश्‍यकता क्‍यों होती है?

राशन कार्ड एक दस्‍तावेज है जो सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत उचित दर की दुकानों के आवश्‍यक वस्‍तुएं खरीदने के लिए प्रयोजन से राज्‍य सरकार के आदेश से प्राधिकार से जारी किया जाता है। राज्‍य सरकार गरीबी रेखा के ऊपर, गरीबी रेखा के नीचे और अन्‍तोदय परिवारों के लिए विशिष्‍ट राशन कार्ड जारी करती है और राशन कार्डों की समय समय पर समीक्षा एवं जांच करती है।
राशन कार्ड भारतीय नागरिकों के लिए बहुत ही उपयोगी दस्‍तावेज है। यह सब्सिडी दर पर अनिवार्य वस्‍तुएं खरीदने में सहायता करके पैसे बचाने में मदद करता है।
आजकल यह पहचान का भी अनिवार्य साधन बन गया है। जब आप अन्‍य दस्‍तावेजों के लिए आवेदन करते हैं जैसे निवास स्‍थान का प्रमाणपत्र, अपना नाम मतदाता सूची में शामिल करने आदि के लिए, तो आप पहचान के प्रमाण के रूप में राशन कार्ड की प्रति दर्शा सकते हैं।
गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले परिवार नीला कार्ड के लिए हकदार होते हैं, जिसके तहत के विशेष सब्सिडी ले सकते है। स्‍थायी राशन कार्ड के अतिरिक्‍त राज्‍य अस्‍थायी राशन कार्ड भी जारी करता है, जो विनिर्दिष्‍ट माहों की अवधि के लिए वैध होते है, और ये राहत के प्रयोजनों से जारी किए जाते हैं।

प्रेमचंद

  • भारत के उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद (जन्म- 31 जुलाई, 1880 - मृत्यु- 8 अक्टूबर, 1936) के युग का विस्तार सन 1880 से 1936 तक है। यह कालखण्ड भारत के इतिहास में बहुत महत्त्व का है। इस युग में भारत का स्वतंत्रता-संग्राम नई मंज़िलों से गुज़रा।
  • प्रेमचंद का वास्तविक नाम धनपत राय श्रीवास्तव था। वे एक सफल लेखक, देशभक्त नागरिक, कुशल वक्ता, ज़िम्मेदार संपादक और संवेदनशील रचनाकार थे। बीसवीं शती के पूर्वार्द्ध में जब हिन्दी में काम करने की तकनीकी सुविधाएँ नहीं थीं फिर भी इतना काम करने वाला लेखक उनके सिवा कोई दूसरा नहीं हुआ।

जन्म

प्रेमचंद का जन्म वाराणसी से लगभग चार मील दूर, लमही नाम के गाँव में 31 जुलाई, 1880 को हुआ। प्रेमचंद के पिताजी मुंशी अजायब लाल और माता आनन्दी देवी थीं। प्रेमचंद का बचपन गाँव में बीता था। वे नटखट और खिलाड़ी बालक थे और खेतों से शाक-सब्ज़ी और पेड़ों से फल चुराने में दक्ष थे। उन्हें मिठाई का बड़ा शौक़ था और विशेष रूप से गुड़ से उन्हें बहुत प्रेम था। बचपन में उनकी शिक्षा-दीक्षा लमही में हुई और एक मौलवी साहब से उन्होंने उर्दू और फ़ारसी पढ़ना सीखा। एक रुपया चुराने पर ‘बचपन’ में उन पर बुरी तरह मार पड़ी थी। उनकी कहानी, ‘कज़ाकी’, उनकी अपनी बाल-स्मृतियों पर आधारित है। कज़ाकी डाक-विभाग का हरकारा था और बड़ी लम्बी-लम्बी यात्राएँ करता था। वह बालक प्रेमचंद के लिए सदैव अपने साथ कुछ सौगात लाता था। कहानी में वह बच्चे के लिये हिरन का छौना लाता है और डाकघर में देरी से पहुँचने के कारण नौकरी से अलग कर दिया जाता है। हिरन के बच्चे के पीछे दौड़ते-दौड़ते वह अति विलम्ब से डाक घर लौटा था। कज़ाकी का व्यक्तित्व अतिशय मानवीयता में डूबा है। वह शालीनता और आत्मसम्मान का पुतला है, किन्तु मानवीय करुणा से उसका हृदय भरा है।

भारत के पशु पक्षी

साँचा:भारत पृष्ठ पशु पक्षी 

वन्य जीवन प्रकृति की अमूल्य देन है। भविष्य में वन्य प्राणियों की समाप्ति की आशंका के कारण भारत में सर्वप्रथम 7 जुलाई, 1955 को वन्य प्राणी दिवस मनाया गया । यह भी निर्णय लिया गया कि प्रत्येक वर्ष दो अक्तूबर से पूरे सप्ताह तक वन्य प्राणी 
सप्ताह मनाया जाएगा। वर्ष 1956 से वन्य प्राणी सप्ताह मनाया जा रहा है। भारत के संरक्षण कार्यक्रम की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक मज़बूत संस्थागत ढांचे की रचना की गयी है । जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इण्डिया, बोटेनिकल सर्वे आफ इण्डिया जैसी प्रमुख संस्थाओं तथा भारतीय वन्य जीवन संस्थान, भारतीय वन्य अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी तथा सलीम अली स्कूल ऑफ आरिन्थोलॉजी जैसे संस्थान वन्य जीवन संबंधी शिक्षा और अनुसंधान कार्य में लगे हैं। भारत कई प्रकार के जंगलों जीवों का, अनेक पेड़ पौधों और पशु-पक्षियों का घर है। शानदार हाथी, मोर का नाच, ऊँट की सैर, शेरों की दहाड़ सभी एक अनोखे अनुभव है। यहाँ के पशु पक्षियों को अपने प्राकृतिक निवासस्थान में देखना आनन्दायक है। भारत में जंगली जीवों को देखने पर्यटक आते हैं। यहाँ जंगली जीवों की बहुत बड़ी संख्या है। भारत में 70 से अधिक राष्ट्रीय उद्यान और 400 जंगली जीवों के अभयारण्य है और पक्षी अभयारण्य भी हैं।

बल्ब का खरगोश



अगर घर पर एक सुन्दर खरगोश बनाना चाहते हो तो यह आजमाओ।
तुम्हें चाहिए : फ्यूज बल्ब, रुई, गोंद, काली मिर्च के दाने, कैंची, कुछ बिन्दियां। एक बल्ब लेकर उस पर पूरी तरह रूई चिपकाओ। उसका कोई हिस्सा खुला नहीं रहना चाहिये। खरगोश के मुंह की ओर थोड़ी ज्यादा रुई चिपकाओ। इसके बाद रूई के दो टुकड़ों को कैंची की मदद से खरगोश के कानों के आकार में काटो। इन कानों को खरगोश के सिर पर चिपका दो। इसके बाद खरगोश के पैरों की जगह पर चार रुई के गोले चिपकाओ। एक गोला पूंछ की जगह भी चिपकाओ।

अगर खरगोश की मूंछे बनानी हैं तो मुंह के आगे झाड़ू की पतली सींके या रेशे चिपका दो। आंखों के लिये दो काली मिर्च के दाने चिपकाने होंगे। मुंह की जगह काले या लाल कागज से या फिर एक बड़ी बिन्दी से चन्द्र का आकार काट कर चिपका दो। तुम्हारा खूबसूरत, प्यारा सा खरगोश तैयार है।

लेखकः साक्षी खन्ना, चित्र शिनोद ए.पी.